बुधवार, 15 जुलाई 2020

कुछ बातें, कुछ यादें 27, हीरो, एक्टर और सेलेब्रेटीज


    बचपन से ही मुझे फिल्में देखने का शौक था। उन दिनो कुछ लोग गांॅवों में वीडियो दिखाने लाते थे। वे चार -पांॅच फिल्मों के वीडियो लाकर सामूहिक रूप से दिखाते थे।  जब कक्षा 9 में राजकीय इंटर काॅलेज श्रीनगर  में प्रवेश लिया तो वहांॅ  बड़े पर्दे पर फिल्में देखने का अवसर प्राप्त हुआ । जब कोई फिल्म देखकर आते तो साथी लोग पूछते,‘‘ फिल्म कैसी थी ? इस फिल्म में हीरो कौन था ? हीरोइन कौन थी ?  गुण्डा कौन था ? उस समय हमें हीरो और एक्टर (अभिनेता)  तथा हीरोइन और एक्ट्रेस (अभिनेत्री) में क्या अंतर होता है ? यह पता नहीं था । जिसको भी इनके बीच के अंतर के बारे में पूछते वह यही कहता कि इनके बीच कोई अंतर नहीं है।
     बाद में कुछ समझ बनी तो ज्ञात हुआ कि हीरो फिल्म की कहानी का मुख्य पात्र होता है। उसके समानान्तर हीरोइन कहानी की मुख्य स्त्री पात्र होती है। जो कहानी के मुख्य पात्र का अभिनय करता है वह अभिनेता है। बाद में शिक्षक के रूप में जब बच्चों से यही प्रश्न पूछा तो बच्चों ने भी हीरो और अभिनेता को एक ही माना ।
    फिल्में हमारे दिलो दिमाग पर बहुत प्रभाव डालती हैं।  चाहे सामाजिक मुद्दों पर आधारित विचारोत्तेजक फिल्म हो, किसी महापुरुष के जीवन पर बनी हो , प्रेम कहानी या बदले की भावना पर आधारित हो । फिल्में हमें सोचने को भी मजबूर करती हैं और मुख्य रूप में हमारा मनोरंजन करती हैं। इसलिए फिल्मों के निर्माता-निर्देशक, संगीतकार, गायक-गायिकाओं के साथ अभिनेता और अभिनेत्री और पर्दे की पीछे भूमिका निभाने वाले  हमारा मनोरंजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं। इसलिए अच्छी फिल्में बनाने वाले निर्माता  - निर्देशकों, अच्छा संगीत देने वाले संगीतकारों , अच्छे गाने लिखने वाले गीतकारों , अच्छा गायन करने वाले गायक-गायिकाओं के साथ ही अच्छा अभिनय करने वाले अभिनेता- अभिनेत्रियों की अभिनय कला की हमें सराहना अवश्य करनी चाहिए ।
   मुझे याद है एक बार एक बच्चा एक पुस्तक लेकर मेरे पास आया । वह बोला, ‘‘सर! इसमें लिखा हुआ है कि डंींजउं  ळंदकीप  पे  ीमतव  व ि छंजपवद ण् तो क्या महात्मा गांधी फिल्मों में काम करते थे ? तब मैंने उस बच्चे को हीरो - एक्टर और हीरोइन- एक्ट्रेस में अंतर समझाया । (अब तो स्त्री और पुरुष  पात्रों की भूमिका निभाने वालों के लिए कई जगह एक्टर शब्द ही प्रयोग में लाया जाता है )। उसे इतिहास के नायक -नायिकाओं के बारे में भी समझाया।
   हम प्रायः दैनिक जीवन में इतिहास और समाज के वास्तविक नायक-नायिकाओं को फिल्मों की कहानी के नायक- नायिकाओं की भूमिका निभाने वाले अभिनेताओं की तुलना में अधिक  महत्व नहीं देते हैं। हमारे समाज के लिए प्रतिबद्ध वैज्ञानिक, चिकित्सक, सैनिक, पुलिस, पत्रकार, साहित्यकार , सूचना अधिकार कार्यकर्ता आदि के बजाए फिल्म के अभिनेता- अभिनेत्रियों  को अपना आदर्श मान बैठते हैं। कई बार उनकी तरह चाल ढाल , हेयर स्टाइल और फैशन को अपनाते हैं और उन्हें ही सेलेब्रेटी के रूप में मान्यता देते हैं। उन्हें भगवान तक का दर्जा दे जाते हैं।

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